Tuesday, 27 Oct 2020

लखनऊ – 5 सितंबर शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं,गुरु बिना छात्र,छात्र बिना गुरु अधूरे, सम्पादक सीएनआई, टुडे,लखनऊ

लखनऊ हर साल की तरह इस बार भी शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है बड़े ही हर्षोल्लास के साथ लोगों ने हर साल शिक्षक दिवस मनाया और इस बार भी मना रहे है, लेकिन बच्चों की अनुपस्थिति होने के कारण शिक्षक दिवस कार्यक्रम थोड़ा मायूसी रही क्योंकि इस कोविड-19 महामारी के चलते सरकार द्वारा लॉकडाउन और समाजिक दूरी बनाए रखने का जो निर्णय था उसको देखते हुए इस बार सभी कॉलेज स्कूल बंद रहेंगे इसके कारण बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा रही और बच्चे अपने गुरुजनों शिक्षकों से दूर हो गए जिसके कारण एक बहुत ही बड़ा सामाजिक नुकसान हुआ। लेकिन बच्चों के भविष्य और जीवन को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों ने भी इस बलिदान को सिर माथे लगाया और बच्चों को पूरा सहयोग किया घर से बैठकर ही उनकी परीक्षा और पढ़ाई की व्यवस्था की जिसके कारण आज सभी शिक्षक यह बता रहे हैं की
छात्र बिना गुरु और गुरु बिना छात्र अधूरा होता है”

5 सितंबर भारत में टीचर्स डे के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन स्कूलों तरह-तरह के कार्यक्रम होते हैं और बच्चे टीचर्स बनते हैं. एक शिक्षक का किसी भी छात्र के जीवन में खास महत्व होता है. कहा जाता है कि किसी भी बच्चे के लिए सबसे पहले स्थान पर उसके माता-पिता और फिर दूसरे स्थान पर शिक्षक होता है. शिक्षक एक बच्चे के भविष्य में महत्वपूर्ण योगदान देता है. एक शिक्षक के बिना छात्र का जीवन अधूरा रहता है. शिक्षक दिवस आने में कुछ ही दिन बाकी हैं ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है और इन दिन को मनाने के पीछे क्या महत्व है.

भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन (5 सितंबर) भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को 1962 से शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. उन्होंने अपने छात्रों से जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा जताई थी. दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में अलग-अलग तारीख पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है. देश के पहले उप-राष्‍ट्रपति डॉ राधाकृष्‍णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुमनी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. वे बचपन से ही किताबें पढ़ने के शौकीन थे और स्वामी विवेकानंद से काफी प्रभावित थे. राधाकृष्णन का निधन चेन्नई में 17 अप्रैल 1975 को हुआ था. 

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